Wednesday, 16 January 2013

यह कौन , है मौन - सा प्रेमी .....मेरे भीतर ......
जो मुझे राह दिखाता , सुझाता और बुझाता ......
जो मुझे सहनशील बनता , समझाता और सिखाता......
जो मुझे शाँत करता , सुख और तृप्त करता .....
ओह !!! मैं तो भूल ही गई 
तुम्हारा वृन्दावन ,निज स्थान तो 
तो मेरे मन का आँगन ही तो है......
.........प्रार्थना ..........

2 comments:

  1. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  2. बहुत सुन्दर...

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