हृदय की बंजर जमीं पर,जब भक्ति की स्नेह वर्षा होती है तो कुछ अंकुर स्वतः ही फूट पड़ते हैं.....उन पल्लवों पर कुछ ओस की बूँदें भावना बन कर उभर जातीं हैं.....बस ये वही आवेग हैं......
Monday, 30 July 2012
मैं हूँ सबसे छोटी,लिए छोटी-सी आशा
जीवन है मेरा छोटा-सा, चाहूँ छोटी-छोटी सी ही खुशियाँ.....
नभ से छोटे-छोटे तारे लाऊँ, धरा से छोटी-छोटी कुशायें......
बालरूप की छोटी-छोटी मुस्कानें, पोरों के छोटी-छोटी छूअन ....
खगों के छोटे-छोटे दाने चुगना ,रिमझम में पेड़ों पर दुबकना....
इन्हें देख पाना ही मेरे जीवन की छोटी-छोटी....सी ही ....खुशियाँ.......
.....प्रार्थना.......
Thursday, 26 July 2012
Saturday, 7 July 2012
ओ .....कारे.... बदरवा ......
काहे को... पीहर की याद दिलावे
वो बचपन में अटारी पे चढ़
माँ को पुकारना और फिर डांट खाना......
गैस खत्म होने पर ,
चूल्हे की चाय-ढूध पीते-पीते पल्लू को मुठ्ठी में पकड़ते जाना...और मुँह बनाना
और माँ को सिगड़ी पर खाना बनाते हुए देखना
शिव जी का अवषेक, श्रृंगार और रुद्र्काष्ट्म..आरती.....
पता नहीं तू मुझे मेरी कमजोरी गिना रहा कि....मजबूत बना रहा.....
ओ...कारे....बदरवा .......
काहे को... पीहर की याद दिलावे
वो बचपन में अटारी पे चढ़
माँ को पुकारना और फिर डांट खाना......
गैस खत्म होने पर ,
चूल्हे की चाय-ढूध पीते-पीते पल्लू को मुठ्ठी में पकड़ते जाना...और मुँह बनाना
और माँ को सिगड़ी पर खाना बनाते हुए देखना
शिव जी का अवषेक, श्रृंगार और रुद्र्काष्ट्म..आरती.....
पता नहीं तू मुझे मेरी कमजोरी गिना रहा कि....मजबूत बना रहा.....
ओ...कारे....बदरवा .......
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