Thursday, 2 August 2012


तेरा ......प्रेम में ना जाने कैसा द्वन्द्ध है...  ??...."कान्हा".....
तू ना मिले तो भी ये बहते हैं.....अधीर हृदय के.....मौन में .....
और मिले तो भी ये बहते ही... हैं.......तेरे  प्रेम..... मगन-हृदय..... में.....
किसे लुभाने चले हो कान्हा.....
इतना श्रंगार कर किसे रिझाने चले हो, छेड़ रहीं गोपियाँ
क्यों ना .....तुम ....???
हम में से ही किसी को चुन लो...ना......
.....प्रार्थना .......
तू मेरे ह्रदय के बसाये , राधे-कुंज में आ के तो देख.... 
तेरे कोमल चरणों की आहट से 
कान्हा सुन इधर ही बरबस ही.....चलें आयेगें .....
 तू मेरे ह्रदय के बसाये , राधे-कुंज में आ के तो देख.... 
तेरे कोमल चरणों की आहट से 
कान्हा सुन इधर ही बरबस ही.....चलें आयेगें ......
...........प्रार्थना.....

Monday, 30 July 2012

मैं हूँ सबसे छोटी,लिए छोटी-सी आशा 
जीवन है मेरा छोटा-सा, चाहूँ छोटी-छोटी  सी ही खुशियाँ.....
नभ से छोटे-छोटे तारे लाऊँ, धरा से छोटी-छोटी कुशायें......
बालरूप की छोटी-छोटी मुस्कानें, पोरों के छोटी-छोटी छूअन ....
खगों के छोटे-छोटे दाने चुगना ,रिमझम में पेड़ों पर दुबकना....
इन्हें देख पाना ही मेरे जीवन की छोटी-छोटी....सी ही ....खुशियाँ.......
.....प्रार्थना.......

Thursday, 26 July 2012


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Tuesday, 17 July 2012



Saturday, 7 July 2012

ओ .....कारे.... बदरवा ......
काहे को... पीहर की याद दिलावे
वो बचपन में अटारी पे चढ़ 
माँ को पुकारना और फिर डांट खाना......
गैस खत्म होने पर ,
चूल्हे की चाय-ढूध पीते-पीते पल्लू को मुठ्ठी में पकड़ते जाना...और मुँह बनाना 
और माँ को सिगड़ी पर खाना बनाते हुए देखना
शिव जी का अवषेक, श्रृंगार और रुद्र्काष्ट्म..आरती.....
पता नहीं तू मुझे मेरी कमजोरी गिना रहा कि....मजबूत बना रहा.....
ओ...कारे....बदरवा .......