Monday, 30 July 2012

मैं हूँ सबसे छोटी,लिए छोटी-सी आशा 
जीवन है मेरा छोटा-सा, चाहूँ छोटी-छोटी  सी ही खुशियाँ.....
नभ से छोटे-छोटे तारे लाऊँ, धरा से छोटी-छोटी कुशायें......
बालरूप की छोटी-छोटी मुस्कानें, पोरों के छोटी-छोटी छूअन ....
खगों के छोटे-छोटे दाने चुगना ,रिमझम में पेड़ों पर दुबकना....
इन्हें देख पाना ही मेरे जीवन की छोटी-छोटी....सी ही ....खुशियाँ.......
.....प्रार्थना.......

Thursday, 26 July 2012


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Tuesday, 17 July 2012



Saturday, 7 July 2012

ओ .....कारे.... बदरवा ......
काहे को... पीहर की याद दिलावे
वो बचपन में अटारी पे चढ़ 
माँ को पुकारना और फिर डांट खाना......
गैस खत्म होने पर ,
चूल्हे की चाय-ढूध पीते-पीते पल्लू को मुठ्ठी में पकड़ते जाना...और मुँह बनाना 
और माँ को सिगड़ी पर खाना बनाते हुए देखना
शिव जी का अवषेक, श्रृंगार और रुद्र्काष्ट्म..आरती.....
पता नहीं तू मुझे मेरी कमजोरी गिना रहा कि....मजबूत बना रहा.....
ओ...कारे....बदरवा .......

Wednesday, 27 June 2012


छूटा क्या,
माँ का आंगन
छूटा है, धरा से नेह....
सिमटी हूँ गागर में
न भर पाऊँ,इसे जग-सागर से.......
तेरी छुअन ....गर्माहट ....महक,
क्यों भटकाती है मुझे
इस विरह-तपोवन में.....
प्यासी है मन की धरा,
रीता है सोच का गगन ....
कलम लिए लिख रही हूं तुझे
जिसमें भरी थी तूने कभी , अपने ममता की स्याही.....

Thursday, 10 May 2012

मुझे क्यों हराते हो, मैंने कब जीतना चाहा... और मैं तो सिर्फ चलना ही चाहती थी, तुम्हारे साथ-साथ..... और तुम पाने की बात करते हो, तो पहले मुझे खोज तो लो.... और तुम चेहरा पढ़ने का दावा करते हो, तो पहले मुझे समझो तो..... और हाँ!!!! मुझे ढूँढो मत.....अपने में ही कहीं ...गुम ही रहने.....दो.....

Wednesday, 2 May 2012

तेरी तो हर बात ही निराली थी.... तूने जो झुकाई , मेरे हर कदम पर अपनी बाहों की डाली थी..... तेरी तो हर बात ही अनकही थी.... तूने जो पिलाई , मेरी नासमझी पर अपनी समझ की प्याली थी..... तेरी तो हर बात में ही दूर-दृष्टि थी.... तूने जो बोई, मेरे अंतर-मन पर अपनी सरल-सहज और सहजता की छवि थी.... हे माँ! मेरी तो हर बात ही सदियों पुरानी थी.... तूने जो सुनायी , मैंने भी वो ही निभायी अपनी-तेरी रीत पुरानी....