मैं भी धरती, सी ही हूँ ...
सूखती हूँ,टूटती हूँ,झरती हूँ,रुनदती हूँ
किसी की आस का मुझे भी इंतज़ार है
कुछ कमी सी, मुझे भी लगती है
राह देखती रहती हूँ,किसी के बरसने का .....
हृदय की बंजर जमीं पर,जब भक्ति की स्नेह वर्षा होती है तो कुछ अंकुर स्वतः ही फूट पड़ते हैं.....उन पल्लवों पर कुछ ओस की बूँदें भावना बन कर उभर जातीं हैं.....बस ये वही आवेग हैं......
Saturday, 25 February 2012
Saturday, 18 February 2012
Tuesday, 7 February 2012
Sunday, 8 January 2012
श्रद्धांजली तुम्हें......
हे माँ!!!
सोचती थी कभी
न जाने तुम व्योम को क्यों देखती किस की तलाश थी,
ढूँढा करतीं रीते नयन लिए,अपने भीतर ....
हर पल को तुम
मौन हो कर विचारतीं क्या था वो तुम्हारे भीतर
जिस भाव को मैं अब,
ढूँढा करतीं महसूस करती अपने भीतर......
भटकन शान्त हुई होगी
तुम्हारी अब विलीन होकर
मैं हूँ उस पथ की व्याकुल पथिक-प्राणी जो तुम्हें है,
ढूँढा करती मृग-तृष्णा लिए अपने भीतर.....
हे माँ!!!
सोचती थी कभी
न जाने तुम व्योम को क्यों देखती किस की तलाश थी,
ढूँढा करतीं रीते नयन लिए,अपने भीतर ....
हर पल को तुम
मौन हो कर विचारतीं क्या था वो तुम्हारे भीतर
जिस भाव को मैं अब,
ढूँढा करतीं महसूस करती अपने भीतर......
भटकन शान्त हुई होगी
तुम्हारी अब विलीन होकर
मैं हूँ उस पथ की व्याकुल पथिक-प्राणी जो तुम्हें है,
ढूँढा करती मृग-तृष्णा लिए अपने भीतर.....
Tuesday, 1 November 2011
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