Wednesday, 13 February 2013


On "valentine day" eve .....
"प्रेम"..... को बयाँ...इजहार,....अभिव्यक्त,..महसूस .....
करने या कराने का दिन ....
प्रेम तो हर रिश्ते में है बस पवित्रता , निस्स्वार्थ्ता और गरिमा होनी चाहिए ....क्या मीरा, राधा , सुभद्रा , द्रौपदी ,गोपियाँ आदि इसके उदाहरण काफी नहीं है ....
क्या था उनके भाव में और जो उन्होंने सरलता ....सहजता...और सरसता से पाया .....
इस पर इतना हो - हल्ला क्यों ????
वैसे तो दिन का महत्व नहीं , पर है भी उससे क्या फर्क ?? यह तो बस एक भाव भर है .....जिसका आधार "विश्वास " है......
..........प्रार्थना ........

Sunday, 10 February 2013

मनन ...
"कृपा "....ईश्वरीय कृपा को कैसे महसूस करें और किस रूप में ....
किसी के लिए निस्वार्थ प्रार्थना और सेवा .....अगर आप कर पायें , 
किसी के मन को समझ कर उसे सही दिशा दिखलायें ... उसकी सोच ही बदल जाये , 
आपका मन अपने में ही रमने लगे......आप स्वयं ही के साथी बन जायें ,
आपको आपके जैसे ही लोग मिलने लगे .......स्नेह मिलने लगे ,
ऐसी ही कई और कृपा हैं , जो आप में कहीं ना कहीं किसी रूप में बहतीं हुई महसूस होगीं ..
कृपा का सही अर्थ तब है , जब आप ईश्वर का माध्यम बन जायें...उसकी करुणा आप में बहने लगे ...
............प्रार्थना .........

Monday, 21 January 2013

ये तेरे नयनों की ,
 मौन की कौन - सी बिरली भाषा है 
जो मुझ तक और 
मुझमें सरलता - सहजता से  हृदय में उतर जाती है ....
तुझे निहारते ही अपनी सुध-बुध में ,
तुझे ढूँढा करती हूँ सदा.......
........प्रार्थना ................

अपनी तलाश जारी है,  अपनी जद्दोजहद खुद से,  अपने को खोजतीं हूँ खुद में ,
हे खुदा !! मुझे तराशते वक़्त तुम्हे , मेरे वजूद और मेरा जरा भी ख्याल ना आया......
........प्रार्थना .............

Wednesday, 16 January 2013

यह कौन , है मौन - सा प्रेमी .....मेरे भीतर ......
जो मुझे राह दिखाता , सुझाता और बुझाता ......
जो मुझे सहनशील बनता , समझाता और सिखाता......
जो मुझे शाँत करता , सुख और तृप्त करता .....
ओह !!! मैं तो भूल ही गई 
तुम्हारा वृन्दावन ,निज स्थान तो 
तो मेरे मन का आँगन ही तो है......
.........प्रार्थना ..........
मनन ......
हम से वही छूटता है जो हमारा नहीं है या जो हमारे भाग्य में नहीं है .....और हम यही सोच कर दुखी होते हैं पर हमें जो मिला है या जो मिल रहा है उस सुख के बारे में नहीं सोचते .....अगर हम दोनों को तौल कर देखें तो पाएंगे कि जो सुख का स्तर हम भोग रहे हैं वह अत्यंत जयादा है , उस दुःख के समक्ष .......और यह सुख आपके साथ शायद जीवन परयन्त्र साथ रहेगा ......इसलिए हमें आज के सुख में और उसके साथ जीने की कोशिश करनी चाहिए ......
बस यूँ ही एक विचार मन में आया .......
..........प्रार्थना ............

Monday, 17 December 2012

ना जाने क्यों हो जाती है आँखें नम 
तू ना जाने कहाँ , 
एक टीस भरी आह की 
किसी कोने में छुपी मेरे भीतर ......
तुझे भूल जाना चाहूँ 
ये फितरत चाह कर भी ,
ना कर पाई अपने भीतर.....
अब तो तू बस एक गठरी - सी 
कहीं दबी-छुपी -सी पड़ी है ,
मन की कोठरी में कहीं भीतर ........
.......माँ तेरी प्रार्थना ......................