हृदय की बंजर जमीं पर,जब भक्ति की स्नेह वर्षा होती है तो कुछ अंकुर स्वतः ही फूट पड़ते हैं.....उन पल्लवों पर कुछ ओस की बूँदें भावना बन कर उभर जातीं हैं.....बस ये वही आवेग हैं......
Monday, 30 July 2012
मैं हूँ सबसे छोटी,लिए छोटी-सी आशा
जीवन है मेरा छोटा-सा, चाहूँ छोटी-छोटी सी ही खुशियाँ.....
नभ से छोटे-छोटे तारे लाऊँ, धरा से छोटी-छोटी कुशायें......
बालरूप की छोटी-छोटी मुस्कानें, पोरों के छोटी-छोटी छूअन ....
खगों के छोटे-छोटे दाने चुगना ,रिमझम में पेड़ों पर दुबकना....
इन्हें देख पाना ही मेरे जीवन की छोटी-छोटी....सी ही ....खुशियाँ.......
.....प्रार्थना.......
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